Wednesday, October 29, 2014

मुझे दीवाना ना कर बांवरे ...




मुझे दीवाना ना कर बांवरे 
अपनी अदाओं से ना छल सांवरे
मैं हो रही कमज़ोर जान रे
ना सता यूं मैं हो रही बावरी रे
धडकनो की धार तेज़ हो रही रे
आग कहीं लगी हैं बूझा जा मतवारे
किसी बहाने चले आ सुन छलिया रे
ना और तड़पा यूं दूर रेहाकर पिया रे
दूरी ना सही विरहा की घरी आई रे
बादलों को हटाकर चले आओ बरसात रे
भिगो दे मुझे अपने प्यार से मेरे सजना रे
आस मैं बैठी मैं तेरी दीवानी रे!
~ फ़िज़ा 

दिल में पनपते प्यार के बोल

कभी कुछ गरजते बादल मंडराते हुए छाए बादल एहसासों के अदल -बदल विचारों में विमर्श का दख़ल असमंजस, उलझनों का खेल रखते हमेशा आसमां से मेल फिर व...