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हरियाली फैलाते ये बूँदें...!

ज़मीन पर गिरतीं हैं बूँदें  जाने कितने ऊंचाइयों से  कितने सपने संग लिए  क्या-कुछ देने के लिए  मचलती छलकाती हुई  एक से दो, दो से...