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कब ?

ज़िन्दगी मदहोश होकर चली बारिश की बूंदो सी गिरती हुई कभी जल्दी तो कभी हौले से ठंडी टपकती तो कभी गीली रोमांचक रौंगटे से चुभती हुई गर्म ...