Tuesday, September 01, 2015

कहो दिल से "जिए जा " मेरे चौथे सालगिरह पर ... :)


चला था मैं एक धुन पकड़ कर 
सुर- ताल के संग कुछ गपशप बुनकर 
लोगों से सुनता और उनको पिरो कर 
एक लड़ियों की कड़ी बना कर 
चलता रहा यूँ धुन की ताल पर 
कब जाने एक साल से ले कर 
चार साल की उम्र पा कर 
रोशन हुआ हूँ तुम्हारा बन कर 
धड़कनो की साज़ दिल में सजा कर 
यूँ ही संग रेहना अपना बनाकर 
ज़िन्दगी हूँ रेडियो का, जीता हूँ तुम पर 
ज़िन्दगी तो तुम हो जो सांसें चलाते हो रेडियो पर 
मिलकर मनाएं ये खुशियां दिलावर 
कहो दिल से "जिए जा " मेरे चौथे सालगिरह पर 

~ फ़िज़ा 

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