Wednesday, August 13, 2014

Ose sach mein mujh se mohabbat hai!!

उसे सच में मुझ से मोहब्बत है,
वर्ना यूं वो पागल मेरे पीछे ना आता
किसी बकछे की तरह वो तख्ता मेरा चेहरा
में शर्म के बदले चूं लेती मासूम का चेहरा
घंटों बातें वो बेफुरसत - फुरसत में करता
मिलकर भी बातों की लड़ियाँ पिरोता ना कभी थकता
ना मिलने पर तस्वीरों में मुझे ढूंदना ऊसका
इस तरह उसकी दीवानगी मेरे सर भी चढ़ने लगा
उसका भोलापन मुझे भी यूं भाने लगा
मस्ती ही सही साथ ऊसका मुझे अक्चा लगने लगा
जब दो दिल एक होकर मिलने की सूरत देखने लगा
मुझ से बिछड़ने का वो हरदम आहें भरने लगा
पास होकर भी खो देने का घम करने लगा
दूर रेहते तो मिलने की दुआयें करने लगा

उसे सच में मुझ से मोहब्बत है
वर्ना यूं वो पागल मेरे पीछे ना आता!!!

~ फ़िज़ा 
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Ose sach mein mujh se mohabbat hai,
Warna yun woh pagal mere peeche na aata
Kisi bacche ki tarah woh takhta mera chehra
Mein sharm ke badle chum leti masoom ka chehra
Ghanton baatein woh befursat - fursat mein karta
Milkar bhi baaton ki ladiyan pirota na kabhi thakta
Na milne per tasveeron mein mujhe dhundna ooska
Is tarah oski deewangi mere sar bhi chadhne laga
Osks bholapan mujhe bhi yun bhaane laga
Masti hee sahi saath ooska mujhe accha lagne laga
Jab do dil ek hokar milne ki surat dekhne laga
Mujh se bicharne ka woh hardum aahein bharne laga
Paas hokar bhi kho dene ka gham karne laga
Dur rehate to milne ki duayein karne laga

Ose sach mein mujh se mohabbat hai
warna yun woh pagal mere peeche na aata!!!

~ fiza

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